जीवन की फलश्रुति मुक्ति है- आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी
जीव बांधते हैं परमात्मा मुक्त करते हैं

आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी ने मिनाल स्थित श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णता दिवस पर यह बताया की प्रभु प्रेम के वशीभूत होकर सबका मंगल ही करते हैं! वे उलझाते नहीं, सुलझाते हैं। अत्यंत भावपूर्ण कथा के प्रसंग में पूज्य आचार्य जी ने आज भगवान श्री कृष्ण के आठों विवाहों की मनोरम झांकी प्रस्तुत की। सुदामा चरित् पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मित्र! मित्र की कमियों को बिना बताए ही पूरी कर देता है, यही मित्र धर्म है। दत्तात्रेय द्वारा चौबीस गुरुओं की सुंदर कथा सुनकर प्रत्येक श्रोता को भाव विभोर कर दिया। वृक्षारोपण का संदेश तथा घर-घर रामचरितमानस के पठन-पाठन पर बल दिया। जो लोग प्रातः काल उठते हैं उनका शरीर निरोग रहता है तथा जो अपने बड़ों को प्रणाम करते हैं वे सदैव विनम्रता के कारण आदर पाते हैं।
विद्वान् आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी जी का सभी ने सम्मान किया एवं सुमधुर कथा के लिए समस्त क्षेत्र वासियों ने अभिनंदन किया।
श्रीमद् भागवत कथा में दूर-दूर से भागवत प्रेमी पधार रहे हैं। पूज्य संत श्री अनिलानंद जी, श्री गिरीश शर्मा जी, श्री श्रीकान्त अवस्थी जी,सागर से श्री घनश्याम दत्त तिवारी जी, श्री महेंद्र दुबे जी, श्रीमती उमा दुबे जी, अंबिकापुर से नरेंद्र दुबे जी एवं भारती दुबे जी, जबलपुर से चंद्रभान उपाध्याय जी एवं स्नेह लता उपाध्याय जी, दमोह से श्री कैलाश नारायण शुक्ला जी एवं श्रीमती सुधा शुक्ला जी, नासिक से गोरख पाटिल जी और श्रीमती स्मिता पाटिल जी, नई दिल्ली से श्री प्रदीप दुबे जी एवं श्रीमती सीमा दुबे जी, गंज बासौदा से श्री संतोष शर्मा जी एवं श्रीमती रमा शर्मा जी, दमोह से श्री कैलाश तिवारी जी एवं श्रीमती प्रज्ञा तिवारी जी, सागर से श्री अनिल दत्त चौबे जी एवं श्रीमती आरती चौबे जी, भोपाल से श्री राजेंद्र दुबे जी, अमित चतुर्वेदी जी, श्री शशांक गुबरेले जी एवं शशि गुबरेले जी, अंकिता उपाध्याय एवं अभिनव उपाध्याय जी, श्री अवतार शर्मा जी एवं श्रीमती राधा शर्मा जी, शांतनु शर्मा जी, श्रीमती ज्योति शर्मा जी, श्री राम प्रकाश शर्मा जी, श्री भूपेंद्र शर्मा जी एवं श्रीमती नेहा शर्मा आदि गणमान्य महानुभाव सहित बहुसंख्यक रूप से मिनाल वासी उपस्थित रहे।
कथा यजमान श्री सी पी उपाध्याय एवं मनोरम उपाध्याय जी ने सभी के प्रति धन्यवाद प्रकट किया। अनिमेष एवं हर्षित ने व्यवस्था पक्ष के लिए श्री रामबाबू शर्मा जी का धन्यवाद एवं आचार्य श्री रवि तिवारी जी का आभार माना। संगीतकार श्री विपिन चौबे जी ने अद्भुत प्रस्तुतियां दी। सहयोग के लिए पार्षद श्रीमती शिरोमणि शर्मा एवं मिनाल रेसीडेंसी का आभार माना।




