देव प्रबोधिनी एकादशी पर क्या करें

देव प्रबोधिनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन भगवान नारायण योगनिद्रा का त्याग करते हैं और सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। इसके बाद से ही चार्तुमास का अंत होता है और शुभ व मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। पुराणों में बताया गया है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में देव प्रबोधिनी एकादशी को लेकर कुछ विशेष नियम के बारे में बताया गया है, इन नियमों का पालन करने से भाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में मंगल बना रहता है। वहीं इन नियमों की अनदेखी की जाए तो कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं देव प्रबोधिनी एकादशी पर भाग्य वृद्धि के लिए क्या करें क्या ना करें….
देव प्रबोधिनी एकादशी पर क्या करें
- देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए और पितरों के नाम का इस दिन दान भी अवश्य करना चाहिए।
- भगवान विष्णु का अभिषेक करें और देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और श्रीहरि का भजन कीर्तन भी करें।
- भगवान विष्णु का भोग लगाएं और भोग में गन्ना व सिंघाड़ा भी अवश्य रखें।
- देव प्रबोधिनी एकादशी तिथि पर निर्जला उपवास रखें और भजन कार्तिक और दान अवश्य करें।
- देव प्रबोधिनी एकादशी पर गाय की सेवा करें और गरीब व जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।
देव प्रबोधिनी एकादशी पर क्या ना करें
- देव प्रबोधिनी एकादशी पर चावल का सेवन करने से बचना चाहिए। बताया जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है।
- एकादशी पर घर या बाहर लड़ाई झगड़ा करने से बचना चाहिए और भूलकर भी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
- एकादशी तिथि के दिन मांस-मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही इस दिन लहसुन-प्याज आदि तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। अगर आप व्रत नहीं भी कर रहे हैं तो इस दिन सात्विक आहार ही लें।
- देव प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह किया जाता है इसलिए इस दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
- देव प्रबोधिनी एकादशी पर किसी के बारे में गलत विचार नहीं लाने चाहिए। साथ ही गोभी, पालक आदि चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।
- एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। साथ ही भूलकर नाखून या बाल नहीं कटवाने चाहिए।
- एकादशी के दिन कम बोलें और मन ही मन भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें।


