ब्रेकिंग
विद्यालयों में कौशल शिक्षा को अनिवार्य बनाना: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम *ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज तक पहुँचे : श्री संजय कुमार मिश्रा * कोई भी विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित न रहे- श्री कैलाश जाटव सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय सिम कार्ड और बैंक खातों को एक्टिवेट करने के बाद दुबई भेजा जाता था उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से दायर दूसरी ज़मानत याचिकाओं पर........... ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल टीएमसी अध्यक्ष का पदभार संभाला भारत में घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अब देशभर में निर्णायक कार्रवाई तेज अमरनाथ यात्रा 2026, 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी; यात्रा पर जाने से पहले श्रद्धालुओं ... बेल्जियम के एंटवर्प शहर में 10 मंज़िला अपार्टमेंट बिल्डिंग में भीषण आग
धर्म

कौन हैं वनस्पतिदेव, किन लोगों को देते हैं ये दंड

जीवन जीने के लिए धरती पर जीवों को प्रत्येक चीज प्रकृति से ही प्राप्त होती है। फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियां, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज, जल आदि सभी चीजें हमें प्रकृति से ही प्राप्त होते ही हैं। सनातन धर्म में भी प्रकृति का बहुत महत्व बताया गया है। हिन्दू धर्म के कई त्योहार प्रकृति से ही जुड़े हुए हैं। प्रकृति से हमें फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियां, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज, जल आदि सभी प्राप्त होते ही हैं। हिंदू धर्म में माता पार्वती को ही प्रकृति माना गया है। वे ही सारी प्रकृति की रक्षा करती हैं। इसी तरह के वनस्पतिदेव हैं ये सभी वनस्पतियों की रक्षा करते हैं। तो चलिए जानते हैं वनस्पतिदेव की उत्पत्ति कैसे हुई और ये किन लोगों को दंड देते हैं।
who is vanaspati dev know about them

वेदों में भी मिलता है वनस्पति देव का उल्लेख
जिस तरह से अनल देव, वायु देव, सोम देव आदि देव हैं उसी प्रकार से वनस्पतिदेव हैं। पुराणों के अनुसार दस विश्व देव हैं, वनस्पतिदेव को भी दस विश्वदेवों में से एक माना गया है। हिंदू सनातन धर्म के चार वेद हैं. जिनमें से ऋग्वेद और सामवेद में वनस्पति देव का उल्लेख मिलता है।

वनस्पति देव के कर्तव्य
वनस्पति देव वृक्ष, पौधों, लताओं और वनस्पतियों का पोषण-भरण, रक्षा और उनके अनुशासन के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
who is vanaspati dev know about them

जानिए कैसे हुई वनस्पति देव की उत्पत्ति
वनस्पति देव की उत्पत्ति (हिरण्यगर्भा ब्रह्म) के केशों से मानी जाती है। ब्रह्म का तेजस रूप ब्रह्मा जी हैं। हिरण्यगर्भा ब्रह्म का अर्थ हैं हिरण्यगर्भ यानि सोने के अंडे के भीतर रहने वाला अर्थात् पूर्ण शुद्ध ज्ञान, को हिरण्य कहा जाता है, चैतन्य ज्ञान के गर्भ में रहने वाला हिरण्यगर्भा ब्रह्म होता है।

who is vanaspati dev know about them

किसे देते हैं वनस्पति देव दंड
जो लोग सूर्यास्त के बाद, ग्रहणकाल में या फिर निषेध तिथियों पर वनस्पतियों को किसी भी प्रकार से भंग करते हैं, उन्हें वनस्पतिदेव दंडित करते हैं।  जो लोगो वनस्पति को अकारण नुकसान पहुंचाते हैं और वनस्पितियों का अपमान करते हैं, उन्हें वनस्पतिदेव दंड देते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Slot Site
Back to top button
Don`t copy text!