भक्ति परमात्मा को प्रिय है

ज्ञानी बहुधा क्रोधी होते हैं लेकिन भक्त सदैव सहृदय और सरल होते हैं।
आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी ने मिनल भोपाल में हो रही श्रीमद् भागवत के प्रथम दिवस पर यह कहा कि जैसे नाम और नामी में भेद नहीं होता, धाम और धामी में भेद नहीं होता उसी तरह भगवान और भगवान की कथा में भेद नहीं होता। भव्य शोभा यात्रा के साथ कथा प्रारंभ हुई, जिसमें हजारों लोग सम्मिलित थे। दिव्य कलश यात्रा में शहर के अनेक गणमान्य जन सम्मिलित रहे।
प्रथम दिवस में आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी ने श्रीमद् भागवत के माहात्म्य का विवेचन किया। मोक्षदायिनी कथा सुनाते हुए उन्होंने भक्ति की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला। गोकर्ण की कथा सुना कर लोगों को भाव विभोर कर दिया। भगवान द्वारा परीक्षित की गर्भ में रक्षा का वृतांत बता कर यह कहा कि भगवान सब की, सब जगह रक्षा कर सकते हैं। विदुर जी की भगवान के चरणों में अपूर्व निष्ठा का भावपूर्ण वर्णन किया। धृतराष्ट्र द्वारा भेजी गई सहायता विदुर जी ने अस्वीकार कर दी और यह कहा कि जो व्यक्ति प्रेम नहीं करता उसका अन्न भी स्वीकार नहीं करना चाहिए। एकांत में भजन, भोजन और शयन करने वाला भगवान को प्रिय है। परमात्मा को प्रदर्शन और झूठ अप्रिय है।
कथा में मुख्य रूप से श्रीमती मनोरमा एवं सी पी उपाध्याय, अनिमेष, हर्षित, दिशा, निधि, हेरम्ब, रवि, विपिन जी सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे। मीनल स्थित एम पी ई बी ग्राउंड में यह विशाल कथा हो रही है जिसमें दूर-दूर से कथा श्रवण के लिए लोग आ रहे हैं।




