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*ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज तक पहुँचे : श्री संजय कुमार मिश्रा *

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, कौशल विकास एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संकल्प के साथ मनाया गया पीएसएससीआईवीई, भोपाल का 33वाँ स्थापना दिवस

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त बनाने के अपने संकल्प के साथ देश के अग्रणी व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों में शामिल पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (पीएसएससीआईवीई), एनसीईआरटी, भोपाल ने रविवार को 33वाँ स्थापना दिवस उत्साह, गरिमा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। समारोह में संस्थान के अधिकारियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, पूर्व अधिकारियों तथा शिक्षा एवं कौशल विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में मध्यप्रदेश शासन के आयुष विभाग के अपर सचिव तथा राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सचिव एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय कुमार मिश्रा, आईएएस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. एस.के. गुप्ता, प्राचार्य, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई), भोपाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े तथा अध्यक्षीय उद्बोधन दिया।
अपने मुख्य उद्बोधन में श्री संजय कुमार मिश्रा, आईएएस ने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा एवं कौशल के मध्य की दूरी को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने ‘एक जिला–एक औषधीय पौधा’ की अवधारणा, आयुष, वेलनेस, औषधीय पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध एवं नवाचार, एनडीकेएम, सतत विकास, तनाव प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को शिक्षा एवं पाठ्यचर्या से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि देश के 782 जिलों में औषधीय पौधों की संभावनाओं पर अध्ययन किया जा रहा है तथा मेडिसिनल प्लांट गार्डन एवं ऑक्सीजन बैंक जैसी अवधारणाएँ भविष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास एवं अनुसंधान आधारित शिक्षा के समन्वय से ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का विस्तार समय की मांग: प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप जिज्ञासा, नैतिकता, जीवन-मूल्यों एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने आयुष, योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, औषधीय एवं सुगंधित पौधों जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए भविष्य उन्मुख कौशल-आधारित जॉब रोल विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने घरेलू सेवाओं तथा पर्यटन क्षेत्र में भी कौशल-आधारित जॉब रोल विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों में नए रोजगार अवसर सृजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कौशल एकीकरण, सतत विकास, स्मार्ट सिटी, पर्यावरण-अनुकूल विकास तथा तनाव प्रबंधन को भी भविष्य की शिक्षा के महत्वपूर्ण आयाम बताया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में कौशल शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: डॉ. दीपक पालीवाल

संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की 33 वर्षों की गौरवपूर्ण उपलब्धियों एवं विकास यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पीएसएससीआईवीई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, पाठ्यचर्या निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्रों में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न कौशल शिक्षा पहलों, नवाचारों तथा राष्ट्रीय स्तर पर निभाई जा रही शैक्षणिक एवं तकनीकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान विद्यार्थियों एवं युवाओं को आत्मनिर्भर एवं रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत पीएम प्रदर्शन बहुउद्देशीय विद्यालय, भोपाल में आयोजित कौशल प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर प्रो. वी.एस. मेहरोत्रा ने “कौशल शिक्षा: कौशल निर्माण से भविष्य निर्माण तक” विषय पर प्रेरक प्रस्तुति देते हुए योग्यता-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम, उभरती प्रौद्योगिकियों, रोजगारपरक कौशलों तथा समग्र विकास के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कौशल शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास एवं राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। इस अवसर पर संस्थान के व्यावसायिक शिक्षा बुलेटिन का विमोचन किया गया। साथ ही, डीएमएस कौशल प्रतियोगिताओं की झलकियों पर आधारित विशेष वीडियो का प्रदर्शन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवाचार एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन को सराहा गया। कार्यक्रम के दौरान पीएसएससीआईवीई के प्रकाशनों एवं शैक्षणिक संसाधनों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने उपस्थित प्रतिभागियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। संस्थान के संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत भारतीय संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की तथा उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का मन मोह लिया।

संस्थान परिसर में किया गया पौधारोपण

समापन अवसर पर मुख्य अतिथि श्री संजय कुमार मिश्रा, आईएएस, संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक पालीवाल तथा अन्य अतिथियों द्वारा संस्थान परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सतत विकास का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में संस्थान के समस्त अधिकारी, शिक्षक, शोधकर्ता, कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। साथ ही संस्थान के पूर्व संयुक्त निदेशक प्रो. आर.बी. शिवागुंडे एवं प्रो. राजेश खंबायत सहित पूर्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए समारोह को और अधिक विशेष एवं स्मरणीय बनाया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. वी.एस. मेहरोत्रा एवं प्रो. पिंकी खन्ना द्वारा किया गया।

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