जरांगे ने भूख हड़ताल समाप्त

मराठा समुदाय के लोगों के आरक्षण के लिए आंदोलनरत कार्यकर्ता मनोज जरांगे की मांगें महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद उन्होंने शनिवार को अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वहीं राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की कि मराठा समुदाय को जब तक आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को दिए जाने वाले सभी लाभ दिए जाएंगे। महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर मराठा समुदाय के सदस्यों के उन सभी सगे-संबंधियों को कुनबी के रूप में मान्यता दे दी है, जिनके कुनबी जाति से संबंध होने के रिकॉर्ड मिले हैं। कुनबी एक कृषक समुदाय है जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आता है। मराठा समुदाय के आरक्षण को लेकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ता मनोज जरांगे समुदाय के सभी लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
इस बीच महाराष्ट्र के छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली अपनी ही सरकार पर निशाना साधा और ओबीसी समुदाय में मराठों के पिछले दरवाजे से प्रवेश देने पर सवाल उठाया। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ओबीसी की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि मराठों को बिना किसी सबूत के कुनबी जाति प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। जरांगे ने अपनी मांगों को लेकर नवी मुंबई के वाशी में शुक्रवार को अपने हजारों समर्थकों की मौजूदगी में भूख हड़ताल शुरू की थी। जरांगे (40) ने पिछले शनिवार को हजारों लोगों के साथ महाराष्ट्र के जालना जिले से विरोध मार्च शुरू किया था। उनकी 26 जनवरी से भूख हड़ताल शुरू करने की योजना थी। जरांगे शुक्रवार सुबह वाशी पहुंचे थे और वह एवं उनके हजारों समर्थक रात भर वहीं रहे।
दरअसल, मुंबई पुलिस ने जरांगे को नोटिस जारी कर कहा था कि शहर के किसी मैदान में इतनीबड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के आ सकने की जगह नहीं है। जरांगे ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि यदि रात तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वह और उनके समर्थक आजाद मैदान में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए शनिवार को मुंबई में प्रवेश करेंगे। सरकार ने जरांगे से बातचीत करने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजकर उन्हें मुंबई में नहीं आने के लिए मनाने की कोशिश की थी। महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार रात जरांगे की विभिन्न मांगों के संबंध में उन्हें एक मसौदा अध्यादेश भेजा था। शिंदे ने मांगों पर चर्चा करने के लिए अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और बाद में जरांगे से मिलने के लिए मसौदा अध्यादेश के साथ एक प्रतिनिधिमंडल भेजा। जरांगे ने शनिवार सुबह अपना प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की और कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने उनकी सभी मांगें मान ली हैं।




