ब्रेकिंग
MP के 25 शहरों में तापमान 10°C से कम: नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सोनिया-राहुल समेत 7 आरोपियों को जारी किया नोटिस यादव समाज शिक्षित, संगठित और स्वावलंबी समाज है:- किशन सूर्यवंशी, अध्यक्ष नगर निगम, भोपाल मनरेगा खत्म कर नई योजना लाएगी मोदी सरकार; अब 100 की जगह 125 दिन काम की गारंटी; महात्मा गांधी का नाम ... बिहार में बड़ा बदलाव: संजय सरावगी बने भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष; दिलीप जायसवाल की जगह संभालेंगे कमा... केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को पाकिस्तान से खतरा:गृह मंत्रालय ने सुरक्षा बढ़ाई; भोपाल-दिल्ली आवास के... मेसी हैदराबाद में थोड़ी देर में फ्रेंडली मैच खेलेंगे:फुटबॉलर कोलकाता स्टेडियम से जल्दी निकले, फैंस ने... विकास और सेवा के दो साल - प्रदेश में दो साल में हुआ अकल्पनीय विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का स्वामी विवेकानंद वि... मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 में होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना, कैबिनेट ने 11,718 करोड़ के बजट को...
धर्म

कैसा था माता सीता का बचपन, जानिए 3 छोटी कथाएं

माता सीता राजा जनक की दत्तक पुत्री थी।
वाल्मीकि रामायण में सीता की एक बहन उर्मिला बताई है। मांडवी व श्रुतकीर्ति जनकजी के छोटे भाई कुशध्वज की बेटियां थी। मानस मैं सीता जनकजी की इकलौती बेटी बताई गई है। कुल मिलाकर सीताजी की तीन बहनें थीं। उनके भाई का नाम मंगलदेव है जो धरती माता के पुत्र हैं।
1. पहली कथा : देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें ‘जानकी’ भी कहा जाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार मिथिला में पड़े भयंकर सूखे से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे, तब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया। उस ऋषि के सुझाव पर राजा जनक ने यज्ञ करवाया और उसके बाद राजा जनक धरती जोतने लगे। तभी उन्हें धरती में से सोने की डलिया में मिट्टी में लिपटी हुई एक सुंदर कन्या मिली। उस कन्या को हाथों में लेकर राजा जनक ने उसे ‘सीता’ नाम दिया और उसे अपनी पुत्री के रूप में अपना लिया।

2. दूसरी कथा : कहते हैं कि माता सीता नने अपने बचपन में एक बार खेल खेल ही में शिवजी के धनुष को उठा लिया था। यह देखकर राजा जनक समझ गए थे कि यह कोई साधारण बालिका नहीं है। इसीलिए उन्होंने सीता स्वयंवर में धनुष तो तोड़ने की प्रतियोगिता रखी, क्योंकि वह यह जानते थे कि इसे वहीं तोड़ सकता है जो महावीर होगा।

3. तीसरी कथा : एक बार सीताजी अपनी सहेलियों के साथ जनकजी के महल के बगीचे में खेल रही थी। वहां पर एक वृक्ष पर उन्होंने तोते के एक जोड़े को देखा। दोनों आपस में बाते कर रहे थे। एक ने कहा कि अयोध्या में एक सुंदर और प्रतापी कुमार हैं जिनका नाम श्रीराम है। उनसे सीताजी का विवाह होगा। सीता ने अपना नाम सुना तो दोनों पक्षी की बात गौर से सुनने लगीं। उन्हें अपने जीवन के बारे में और बातें सुनने की इच्छा हुई। सखी सहेलियों से कहकर उन्होंने दोनों पक्षी पकड़वा लिए।

सीता ने उन्हें प्यार से सहलाया और कहा- भय मत करो! तुम बड़ी अच्छी बातें करते हो। यह बताओ ये ज्ञान तुम्हें कहां से मिला? मुझसे डरने होने की जरूरत नहीं। दोनों का डर समाप्त हुआ। वे समझ गए कि यह स्वयं सीता हैं। दोनों ने बताया कि वाल्मिकी नाम के एक महर्षि हैं। वे उनके आश्रम में ही रहते हैं। वाल्मिकी रोज श्रीराम और सीता के जीवन की चर्चा करते हैं। उन्होंने वहीं यह सब सुना जो अब सब कंठस्थ हो गया है।

Related Articles

Back to top button
Don`t copy text!