ब्रेकिंग
MP के 25 शहरों में तापमान 10°C से कम: नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सोनिया-राहुल समेत 7 आरोपियों को जारी किया नोटिस यादव समाज शिक्षित, संगठित और स्वावलंबी समाज है:- किशन सूर्यवंशी, अध्यक्ष नगर निगम, भोपाल मनरेगा खत्म कर नई योजना लाएगी मोदी सरकार; अब 100 की जगह 125 दिन काम की गारंटी; महात्मा गांधी का नाम ... बिहार में बड़ा बदलाव: संजय सरावगी बने भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष; दिलीप जायसवाल की जगह संभालेंगे कमा... केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को पाकिस्तान से खतरा:गृह मंत्रालय ने सुरक्षा बढ़ाई; भोपाल-दिल्ली आवास के... मेसी हैदराबाद में थोड़ी देर में फ्रेंडली मैच खेलेंगे:फुटबॉलर कोलकाता स्टेडियम से जल्दी निकले, फैंस ने... विकास और सेवा के दो साल - प्रदेश में दो साल में हुआ अकल्पनीय विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का स्वामी विवेकानंद वि... मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 में होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना, कैबिनेट ने 11,718 करोड़ के बजट को...
विदेश

अपराध इतना कम की नीदरलैंड में जेलों पर पड़ रहे ताले 

एम्स्टर्डम । दुनिया का एक देश ऐसा है, जहां जेलों पर ताला डाला जा रहा है। दरअसल नीदरलैंड में क्राइम रेट इतने नीचे जा चुका कि वहां जेलों की जरूरत कम होती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में नीदरलैंड की प्रति 1 लाख की आबादी पर लगभग 53 अपराध हुए। साल 2020 में ये आंकड़ा 58 का था। पिछले 2 दशकों में यहां पर क्राइम का ग्राफ तेजी से कम होता जा रहा है। साल 2016 में ये सबसे कम था, जब हर 1 लाख की आबादी पर केवल 51 लोगों ने ही अपराध किया। ये अपराध हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध नहीं, बल्कि छुटपुट किस्म के होते हैं। दूसरी ओर जेलों की व्यवस्था पर काम करने वाली डेटाबेस संस्था के अनुसार वेनेजुएला में दुनिया में सबसे ज्यादा अपराध होते हैं। यहां हर 1 लाख की आबादी पर 92 हत्याएं होती हैं। ये सिर्फ हत्या है, बाकी अपराध, जैसे चोरी, डकैती, मारपीट, नशा जैसे अपराध और ज्यादा हैं।
इसके पीछे सिर्फ ये वजह नहीं, कि वहां अपराध कम हैं, बल्कि कई और कारण भी हैं। रिसर्च के अनुसार, डच अदालतें कैदियों को जेल की सजा कम ही सुनाती हैं। ये सजा तभी मिलती है, जब अपराध ज्यादा गंभीर हो और अपराधी सोसायटी में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। नीदरलैंड में कस्टोडियल सेंटेंस के 55 प्रतिशत मामलों में एक महीने से भी कम समय के लिए जेल होती है, जबकि तीन चौथाई मामलों में 3 महीने की कैद मिलती है। इसका मतलब है कि प्री-ट्रायल कस्टडी के दौरान ही बहुत से अपराधी सजा पूरी कर लेते हैं और जेल जाने की बजाए घर लौट पाते हैं। अधिकतर कैदियों पर जुर्माना लगाया जाता है, या फिर कम्युनिटी सर्विस से जोड़ दिया जाता है, जैसे सफाई, पौधे लगाना या अस्पतालों में एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस देना।
कैदी परिवार से जुड़े रहें, इसके लिए भी नीदरलैंड सरकार नए प्रयोग करती रही। वहां कैदियों को रात में तय समय के लिए इंटरनेट दिया जाता है, ताकि वे अपने बच्चों को गुडनाइट स्टोरीज सुना सकें या परिवार से बात कर सकें। जेल के वॉर्डन कैदियों को नंबर की बजाए उनके नाम से बुलाते हैं। ये सारी चीजें एक तरह की थैरेपी होती हैं, ताकि जेल से निकलने के बाद कैदी तुरंत सोसायटी से जुड़ सकें। डच प्रशासन मानता है कि लंबे समय तक जेल में रहना कैदी की मानसिक सेहत के लिए खराब होता है और वहां निकलने के बाद और गड़बड़ी कर सकता है।
कैदियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक एंकल मॉनिटरिंग सिस्टम है। उनके पैर में एक ऐसी डिवाइस पहना दी जाती है, जिससे लोकेशन ट्रेस की जा सके। इसके बाद उन्हें मुख्यधारा में छोड़ दिया जाता है। ये डिवाइस एक रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल भेजती है। क्रिमिनल अपनी तय की हुई सीमा से बाहर जाए,तब पुलिस को सूचना मिल जाती है।
दरअसल यह जानना भी जरुरी हैं कि डच देश में ऐसा क्या हुआ, जिसके कारण वहां क्राइम ग्राफ नीचे आया। इसमें सबसे ऊपर है, वहां का सोशल वेलफेयर सिस्टम। यूरोप सहित पूरी दुनिया में ये सबसे अमीर देशों में गिना जाता है, जहां वेलफेयर सिस्टम भी सरकार जमकर खर्च करती है। साल 2022 में फोर्ब्स के अनुसार, यहां की इकनॉमी दुनिया की 15वीं सबसे मजबूत इकनॉमी रही। इसके अलावा यहां की कम जनसंख्या भी एक कारण है।

Related Articles

Check Also
Close
Slot Site
Back to top button
Don`t copy text!