मानसून ने पकड़ी रफ़्तार…

भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार अपनी पूरी रफ्तार में लौटने की तैयारी कर रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने देश में एक साथ दो महत्वपूर्ण मौसम प्रणालियों (वेदर सिस्टम) के सक्रिय होने का संकेत दिया है। इस हफ्ते बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में बनने वाले इन सिस्टम्स के कारण देश के बड़े हिस्सों में व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। इस बदलाव से उत्तर भारत में लंबे समय से भीषण गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है।
मौसम वैज्ञानिक दो अहम मौसम प्रणालियों (वेदर सिस्टम) पर नज़र रख रहे हैं, जिनके इस हफ़्ते बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में बनने की उम्मीद है। इनसे देश के बड़े हिस्सों में व्यापक बारिश होगी और उत्तर भारत में लंबे समय से प्रतीक्षित मानसून की स्थिति भी बनेगी। जून का महीना खत्म होने को है, लेकिन मानसून अभी तक उत्तर भारत में ठीक से जम नहीं पाया है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान भीषण गर्मी और उमस की चपेट में हैं, और कहीं-कहीं होने वाली आंधी-तूफ़ान से ही थोड़ी-बहुत राहत मिल रही है।
हालांकि इस इलाके में नमी लगातार बढ़ी है, लेकिन मानसून का कोई व्यवस्थित सर्कुलेशन न होने के कारण व्यापक बारिश नहीं हो पाई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह स्थिति बदलने वाली है।
इसका मुख्य कारण मानसून ट्रफ़ है, जो कम दबाव वाला एक ऐसा क्षेत्र है जिससे भारत में ज़्यादातर मौसमी बारिश होती है। हालांकि ट्रफ़ बन तो गया है, लेकिन यह अपनी सामान्य स्थिति से काफी उत्तर में, हिमालय की तलहटी के बहुत करीब बना हुआ है। इस वजह से बारिश वाला सक्रिय क्षेत्र इंडो-गैंगेटिक मैदानों से दूर चला गया है, जिससे दिल्ली और आसपास के राज्यों में मानसून के सही हालात बनने में देरी हुई है।




